Wednesday, February 15, 2017

kavya



काव्य, कविता या पद्य, साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी कहानी या मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। भारत में कविता का इतिहास और कविता का दर्शन बहुत पुराना है। इसका प्रारंभ भरतमुनि से समझा जा सकता है। कविता का शाब्दिक अर्थ है काव्यात्मक रचना या कवि की कृति, जो छन्दों की शृंखलाओं में विधिवत बांधी जाती है। काव्य वह वाक्य रचना है जिससे चित्त किसी रस या मनोवेग से पूर्ण हो। अर्थात् वह कला जिसमें चुने हुए शब्दों के द्वारा कल्पना और मनोवेगों का प्रभाव डाला जाता है।

Sunday, January 22, 2017

ठुकरा दो या प्यार करो


एक गहन भाव से भरी, एवं समर्पण भाव से आप्लावित,सुभद्रा कुमारी चौहान की यह  कविता " ठुकरा दो या प्यार करो " में उन्होंने इस चिर सत्य का रूप निर्धारित किया है कि पूजा तथा अर्चन के निमित्त किसी वस्तु की जरूरत नही है। मनुष्य के भाव यदि अमल और धवल हैं तो भगवान भक्त को भी उसी दृष्टि से देखता है । अपनी भावों को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर कवयित्री ने इस कविता में यह संदेश देने का प्रयस किया है कि भगवान भाव के भूखे होते हैं,उन्हे प्रसन्न करने के लिए भक्तों के निर्मल मन का प्रेम ही पर्याप्त है।

देव! तुम्हारे कई उपासक कई ढंग से आते हैं ।
सेवा में बहुमूल्य भेंट वे कई रंग की लाते हैं ॥
धूमधाम से साजबाज से मंदिर में वे आते हैं ।
मुक्तामणि बहुमूल्य वस्तुएँ लाकर तुम्हें चढ़ाते हैं ॥
मैं ही हूँ गरीबिनी ऐसी जो कुछ साथ नहीं लायी ।
फिर भी साहस कर मंदिर में पूजा करने चली आयी ॥
धूप दीप नैवेद्य नहीं है झांकी का शृंगार नहीं ।
हाय! गले में पहनाने को फूलों का भी हार नहीं ॥
मैं कैसे स्तुति करूँ तुम्हारी ? है स्वर में माधुर्य नहीं ।
मन का भाव प्रकट करने को वाणी में चातुर्य नहीं ॥
नहीं दान है, नहीं दक्षिणा ख़ाली हाथ चली आयी ॥
पूजा की विधि नहीं जानती फिर भी नाथ! चली आयी ॥
 पूजा और पुजापा प्रभुवर ! इसी पुजारिन को समझो ।
दान दक्षिणा और निछावर इसी भिखारिन को समझो ॥
 मैं उन्मत्त प्रेम की प्यासी हृदय दिखाने आयी हूँ ।
जो कुछ है, बस यही पास है इसे चढ़ाने आयी हूँ ॥
 चरणों पर अर्पित है, इसको चाहो तो स्वीकार करो ।
यह तो वस्तु तुम्हारी ही है, ठुकरा दो या प्यार करो ॥

मैं तेनु समझावां की ना तेरे बिना लगदा जी

मैं तेनु समझावां की ना तेरे बिना लगदा जी मैं तेनु समझावां की ना तेरे बिना लगदा जी तू की जाने प्यार मेरा मैं करूं इंतजार तेरा तू दिल तूयो जान मेरी मैं तेनु समझावां की ना तेरे बिना लगदा जी तू की जाने प्यार मेरा मैं करूं इंतजार तेरा तू दिल तूयो जान मेरी मैं तेनु समझावां की ना तेरे बिना लगदा जी मेरे दिल ने चुनलैयाने तेरे दिल दिया राहां तू जो मेरे नाल तू रहता तुरपे मेरीया साहा जीना मेरा होए हुण्ड है तेरा की मैं करां तू कर ऐतबार मेरा मैं करूं इन्तेजार तेरा तू दिल तूयो जान मेरी मैं तेनु समझावां की ना तेरे बिना लगदा जी वे चंगा नहियों कीता बिवा वे चंगा नहियों कीता बिवा दिल मेरा तोड़ के वे बड़ा पछताइयां अखां वे बड़ा पछताइयां अखां नाल तेरे जोड़ के तेनु छड्ड के कित्थे जावां तू मेरा परछांवा तेरे मुखड़े विच ही मैं तान रब नू अपने पावां मेरी दुआ हाय सजदा तेरा करदी सदा तू सुन इक़रार मेरा मैं करूं इंतज़ार तेरा तू दिल तुइयो जान मेरी मैं तेनु समझावां की ना तेरे बिना लगदा जी

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