Thursday, February 7, 2008

पिछली रात को ....



इंतजार जैसे उसका इमान हो
कुछ एसे ही वो इंतजार करता रहा
उस लहर का, जो छोड़ गयी थी
कल रात कुछ सीपिया तो कुछ मोती जैसे कदमो के निशां

लहरों का क्या है ,
आती है ... चली जाती है
पर उस किनारे का क्या
जो देता है उतना ही प्यार उतना ही दुलार
हर आने वाली उस लहर को
जिसे आख़िर मे चले जाना है

पल भर का साथ था,
फिर मिलन इंतजार
हर लौटती उस लहर को,
जो छोड़ आई थी अपने कदम-ए-निशां
उस किनारे पर, पिछली रात को ….

KS

K. Singh © 2008. All rights are reserved. No part of this Article, including text and photographs, may be copied, reproduced or transmitted without the express permission of the author.

2 comments:

अनुनाद सिंह said...

कुलदीप भाई,
आपका हिन्दी चिट्ठाकारी में स्वागत है।

यह हिन्दी का सौभाग्य है कि अब उसके साथ प्रोफ़ेशनल और विभिन्न क्षेत्रों के माहिर लोग जुड़ रहे हैं।

आप हिन्दी ब्लाग से जुड़ गये हैं किन्तु मैं आपसे हिन्दी विकिपीडिया से भी जुड़ने का आग्रह करूंगा। कारण साफ है - जब तक विभिन्न विषयों के विषेषज्ञ (इक्सपर्ट) हिन्दी में अच्छे-अच्छे लेख (आर्टिकल) नहीं लिखेंगे, हिन्दी का वास्तविक भला नहीं होगा।

हिन्दी विकिपिडिया पर वैज्ञानिक और तकनीकी विषयों पर लोग लिखने लगे हैं। आप भी दस-बीस अच्छे लेख, रसायन-शास्त्र से सम्बन्धित उपविषयों (टापिक्स) पर लिख सकें तो हिन्दी का और हिन्दीभाषियों का भला हो।

mehek said...

bahut khubsurat gehrai se likha hai apne,kinaron ke bhav aksar bhul jate hai,ye bhi ki kinara bhi leher ke anne ka intazaar karta hai,aur wo laut jati hai tho phir usse bhura bhi lag jata hai,moti aur sipi ke nishan wali pankti lajawab hai.beautiful.
http://mehhekk.wordpress.com/
mehek

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