Friday, February 29, 2008

अमीर खुसरो

 

छाप-तिलक तज दीन्हीं रे तोसे नैना मिला के ।

प्रेम बटी का मदवा पिला के,

मतबारी कर दीन्हीं रे मोंसे नैना मिला के ।

खुसरो निज़ाम पै बलि-बलि जइए

मोहे सुहागन कीन्हीं रे मोसे नैना मिला के ।

 

`2`

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर

ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर ।

जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया

हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर ।

तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है

तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर ।

जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ

तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर ।

मेरी जो मन तुम ने लिया, तुम उठा गम को दिया

तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर ।

खुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब

कुदरत खुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर ।

 

 

अमीर खुसरो

2 comments:

mehhekk said...

bahut sundar hai

mehhekk said...

kuldeepji nahi hum delhi se nahi hai,i dont like to share my personal details with anyone,expect my poems,hope u understand.sadar mehek.

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