Wednesday, December 21, 2016

आज का विचार

हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है।

 - मैथिलीशरण गुप्त।


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