Showing posts with label अमीर खुसरो. Show all posts
Showing posts with label अमीर खुसरो. Show all posts

Saturday, December 31, 2016

अमीर खुसरो की रचनाएँ - 2

खुसरो दरिया प्रेम का, सो उलटी वा की धार, जो उबरो सो डूब गया, जो डूबा हुवा पार।



अमीर खुसरो की रचनाएँ - 2


छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके

प्रेम बटी का मदवा पिलाइके

मतवाली कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके

गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ

बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके

बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजवा

अपनी सी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके

खुसरो निजाम के बल बल जाए

मोहे सुहागन कीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके

Friday, December 30, 2016

अमीर खुसरो की रचनाएँ - 1

जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए,
अजहुँ न आए स्वामी हो
ऐ जो पिया आवन कह गए अजुहँ न आए।
अजहुँ न आए स्वामी हो।
स्वामी हो, स्वामी हो।
आवन कह गए, आए न बाहर मास।
जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए।
अजहुँ न आए।
आवन कह गए।
आवन कह गए।

------
अमीर खुसरो 

Friday, February 29, 2008

अमीर खुसरो

 

छाप-तिलक तज दीन्हीं रे तोसे नैना मिला के ।

प्रेम बटी का मदवा पिला के,

मतबारी कर दीन्हीं रे मोंसे नैना मिला के ।

खुसरो निज़ाम पै बलि-बलि जइए

मोहे सुहागन कीन्हीं रे मोसे नैना मिला के ।

 

`2`

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर

ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर ।

जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया

हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर ।

तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है

तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर ।

जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ

तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर ।

मेरी जो मन तुम ने लिया, तुम उठा गम को दिया

तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर ।

खुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब

कुदरत खुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर ।

 

 

अमीर खुसरो

Popular Posts