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Short stories by मुंशी प्रेमचंद

Novel | उपन्यास Short stories | कहानियाँ

Nirmala | निर्मलाAndher | अन्धेरAnaath Lark | अनाथ लड़कीApani Karnii | अपनी करनीAmrit | अमृतAlgojhya | अलग्योझाAkhiri Tohfa | आख़िरी तोहफ़ाAkhiri Manzil | आखिरी मंजिलAatma-sangeet | आत्म-संगीतAatmaram | आत्मारामAadhar | आधारAalha | आल्हाIzzat ka Khoon | इज्जत का खूनIsteefa | इस्तीफाIdgah | ईदगाहIshwariya Nyay | ईश्वरीय न्यायUddhar | उद्धारEk Aanch ki Kasar | एक ऑंच की कसरActress | एक्ट्रेसKaptaan Sahib | कप्तान साहबKarmon ka Phal | कर्मों का फलCricket Match | क्रिकेट मैचKavach | कवचQaatil | क़ातिलKutsa | कुत्साKoi dukh na ho to bakri kharid laa | कोई दुख न हो तो बकरी खरीद लाKaushal | कौशल़Khudi | खुदीGairat ki Kataar | गैरत की कटारGulli Danda | गुल्‍ली डंडाGhamand Ka putla | घमंड का पुतलाJyoti | ज्‍योतिJaadu | जादूJail | जेलJuloos | जुलूसJhanki | झांकीThaakur ka Kuan | ठाकुर का कुआंTaintar |

कबीर ग्रंथावली

महान भाषाविद् तथा मूर्द्धन्य साहित्यकार डॉ. श्यामसुन्दर दास द्वारा सम्पादित कबीर ग्रंथावली महाकवि संत कबीरदास के विराट काव्य-सर्जना संसार का प्रामाणिक एवं समेकित प्रकाशन है।

सुधि जन  इस महाग्रंथ को कम्पुटर /लैपटॉप/ आई पेड / किंडल इत्यादि पर पढ़ सकते है ।

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कोयल

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काली-काली कू-कू करती, जो है डाली-डाली फिरती! कुछ अपनी हीं धुन में ऐंठी  छिपी हरे पत्तों में बैठी जो पंचम सुर में गाती है वह हीं कोयल कहलाती है. जब जाड़ा कम हो जाता है  सूरज थोड़ा गरमाता है  तब होता है समा निराला  जी को बहुत लुभाने वाला हरे पेड़ सब हो जाते हैं  नये नये पत्ते पाते हैं कितने हीं फल औ फलियों से नई नई कोपल कलियों से भली भांति वे लद जाते हैं बड़े मनोहर दिखलाते हैं रंग रंग के प्यारे प्यारे  फूल फूल जाते हैं सारे बसी हवा बहने लगती है  दिशा सब महकने लगती है तब यह मतवाली होकर  कूक कूक डाली डाली पर अजब समा दिखला देती है सबका मन अपना लेती है लडके जब अपना मुँह खोलो तुम भी मीठी बोली बोलो इससे कितने सुख पाओगे सबके प्यारे बन जाओगे. -अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध