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संदेश

नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभ-कामनायें

कल की नई सुबह इतनी            सुहानी हो जाए;     आपके दुखों की सारी बातें             पुरानी हो जाएं;       दे जाए इतनी खुशियां             ये नव वर्ष आपको;        कि ख़ुशी भी आपके             मुस्कुराहट की            दीवानी हो जाएं ।.. आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभ-कामनायें

अमीर खुसरो की रचनाएँ - 2

खुसरो दरिया प्रेम का, सो उलटी वा की धार,  जो उबरो सो डूब गया, जो डूबा हुवा पार। अमीर खुसरो की रचनाएँ - 2 छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके प्रेम बटी का मदवा पिलाइके मतवाली कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजवा अपनी सी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके खुसरो निजाम के बल बल जाए मोहे सुहागन कीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके

अमीर खुसरो की रचनाएँ - 1

जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए, अजहुँ न आए स्वामी हो ऐ जो पिया आवन कह गए अजुहँ न आए। अजहुँ न आए स्वामी हो। स्वामी हो, स्वामी हो। आवन कह गए, आए न बाहर मास। जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए। अजहुँ न आए। आवन कह गए। आवन कह गए। ------ अमीर खुसरो 

अग्निरेखा (टकरायेगा नहीं)

टकरायेगा नहीं आज उद्धत लहरों से, कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ? अब तक धरती अचल रही पैरों के नीचे, फूलों की दे ओट सुरभि के घेरे खींचे, पर पहुँचेगा पथी दूसरे तट पर उस दिन जब चरणों के नीचे सागर लहरायेगा ! कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ? गर्त शिखर वन, उठे लिए भंवरों का मेला, हुए पिघल ज्योतिष्क तिमिर की निश्चल वेला, तू मोती के द्वीप स्वप्न में रहा खोजता, तब तो बहता समय शिला सा जम जायेगा । कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ? तेरी लौ से दीप्त देव-प्रतिमा की आँखें, किरणें बनी पुजारी के हित वर की पांखें, वज्र-शिला पर गढ़ी ध्वंस की रेखायें क्या यह अंगारक हास नहीं पिघला पायेगा ? कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ? धूल पोंछ कांटे मत गिन छाले मत सहला, मत ठण्डे संकल्प आँसुयों से तू नहला, तुझसे हो यदि अग्नि-स्नात यह प्रलय महोत्सव तभी मरण का स्वस्ति-गान जीवन गायेगा । कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ? टकरायेगा नहीं आज उद्धत लहरों से कौन ज्वार फिर तुझे दिवस तक पहुँचायेगा ? ------------- अग्निरेखा  महादेवी वर्मा

आज का विचार

हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है।  - मैथिलीशरण गुप्त।

हिंदी साहित्य की कालजयी और आधुनिक प्रसिद्ध रचनायें - कविता

काव्य नाटक अंधायुग - धर्मवीर भारती   कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह ‘दिनकर‘ कामायनी - जयशंकर प्रसाद राम की शक्ति पूजा - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला गीतांजलि - रविंद्रनाथ ठाकुर

हिन्दी की उत्कृष्ट रचनाएँ | जो तुम आ जाते एक बार | Jo Tum AA Jate Ek Bar

विरहपूर्ण गीतों की गायिका महादेवी वर्मा आधुनिक युग की मीरा कही जाती है। हादेवी वर्मा  (२६ मार्च १९०७ — ११ सितंबर १९८७) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी ...  महादेवी वर्मा  के मानस बंधुओं में सुमित्रानंदन पंत एवं निराला का नाम लिया जा सकता है, जो उनसे जीवन पर्यन्त राखी बँधवाते रहे। जो तुम आ जाते एक बार कितनी करूणा कितने संदेश पथ में बिछ जाते बन पराग गाता प्राणों का तार तार अनुराग भरा उन्माद राग आँसू लेते वे पथ पखार जो तुम आ जाते एक बार हँस उठते पल में आर्द्र नयन धुल जाता होठों से विषाद छा जाता जीवन में बसंत लुट जाता चिर संचित विराग आँखें देतीं सर्वस्व वार जो तुम आ जाते एक बार