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समय का सदुपयोग | Samay Ka Sadupayog

समय का सदुपयोग: 
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित इस पुस्तक को हर व्यक्ति को पढ़ना चाहिए . यदि हमें जीवन से प्रेम है तो यही उचित है कि समय को व्यर्थनष्ट न करें। मरते समय एक विचारशील व्यक्ति ने अपने जीवन के व्यर्थ ही चले जाने पर अफसोस प्रकट करते हुए कहा था- मैंने समय को नष्ट किया, अब समय मुझे नष्ट कर रहा है। 

खोई दौलत फिर कमाई जा सकती है । भूली हुई विद्या फिरयाद की जा सकती है । खोया स्वास्थ्य चिकित्सा द्वारा लौटाया जासकता है, पर खोया हुआ समय किसी प्रकार नहीं लौट सकता,उसके लिए केवल पश्चाताप ही शेष रह जाता है । 


जिस प्रकार धन के बदले में अभीष्ठित वस्तुएँ खरीदी जास कती हैं, उसी प्रकार समय के बदले में भी विद्या, बुद्धि, लक्ष्मीकीर्ति आरोग्य, सुख-शांति, आदि जो भी वस्तु रुचिकर हो खरीदी जा सकती है । ईश्वर समय रूपी प्रचुर धन देकर मनुष्यको पृथ्वी पर भेजा है और निर्देश दिया है कि इसके बदले में ससारकी जो वस्तु रुचिकर समझें खरीद लें । कितने व्यक्ति है जो समय का मूल्य समझते और उसका सदुपयोग करते है ? अधिकांश लोग आलस्य और प्रमाद में पड़े हुए जीवन के बहुमूल्य क्षणों को यों ही बर्बाद करते रहे हैं।…

Reading List for Summer Holidays | ग्रीष्मकालीन पठन सूची 2018

ग्रीष्मकालीन पठन सूची
चंद्रकांत संताती  (बाबू देवकीनंदन खत्री)निर्मला (मुंशी प्रेमचंद)कामयानी  (जयशंकर प्रसाद )अप्सरा (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला) यम (महादेवी वर्मा)चिदंबर (सुमित्रानंदन पंत)चंद बर्दाई द्वारा पृथ्वीराज रसो



अन्य लेखक जिनकी रचनाये आप जरूर पढ़ें : मृदुला गर्ग,मानु भंडारी, राजेश यादव, मोहन राकेश, यशपाल, निर्मल वर्मा, और अंतिम लेकिन कम से कम नहीं, भगवती चर वर्मा

Mannu Bhandari | मन्नू भंडारी

मन्नू भंडारी (जन्म ३ अप्रैल १९३१) हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं। मध्य प्रदेश में मंदसौर जिले के भानपुरा गाँव में जन्मी मन्नू का बचपन का नाम महेंद्र कुमारी था। लेखन के लिए उन्होंने मन्नू नाम का चुनाव किया। उन्होंने एम ए तक शिक्षा पाई और वर्षों तक दिल्ली के मीरांडा हाउस में अध्यापिका रहीं। धर्मयुग में धारावाहिक रूप से प्रकाशित उपन्यास आपका बंटी से लोकप्रियता प्राप्त करने वाली मन्नू भंडारी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचंद सृजनपीठ की अध्यक्षा भी रहीं। लेखन का संस्कार उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता सुख सम्पतराय भी जाने माने लेखक थे।
प्रमुख कृतियाँकहानीएक प्लेट सैलाब (१९६२)मैं हार गई (१९५७),तीन निगाहों की एक तस्वीर,यही सच है (१९६६),त्रिशंकु'आंखों देखा झूठ'उपन्यास`आपका बंटी' (१९७१)`एक इंच मुस्कान'(१९६२)नाटक `बिना दीवारों का घर' (१९६६) विवाह विच्छेद की त्रासदी में पिस रहे एक बच्चे को केंद्र में रखकर लिखा गया उनका उपन्यास `आपका बंटी' (१९७१) हिन्दी के सफलतम उपन्यासों में गिना जाता है। लेखक और पति राजेंद्र यादव के साथ लिखा गया उनका उपन्यास `एक इंच मुस्कान&…

पूजा-गीत

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वंदना के इन स्वरों में,
एक स्वर मेरा मिला लो।

वंदिनी मा को न भूलो,
राग में जब मत्त झूलो,

अर्चना के रत्नकण में,
एक कण मेरा मिला लो।

जब हृदय का तार बोले,
शृंखला के बंद खोले,

हों जहाँ बलि शीश अगणित,
एक शिर मेरा मिला लो।



सोहनलाल द्विवेदी