कृष्णा सोबती

2017 का ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता समेत कई राष्ट्रीय पुरस्कारों और अलंकरणों से शोभित कृष्णा सोबती का जन्म गुजरात में 18 फरवरी 1925 को हुआ था | विभाजन के बाद वे दिल्ली में आकर बस गयीं | आप का देहावसान २५ जनुअरी २०१९ को एक लम्बी बिमारी के बाद सुबह साढ़े आठ बजे एक निजी अस्पपताल में हो गया |

प्रकाशित कृतियाँ
कहानी संग्रह- बादलों के घेरे - 1980
लम्बी कहानी (आख्यायिका/उपन्यासिका)- डार से बिछुड़ी -1958, मित्रो मरजानी -1967, यारों के यार -1968
तिन पहाड़ -1968, ऐ लड़की -1991,जैनी मेहरबान सिंह -2007,
उपन्यास- सूरजमुखी अँधेरे के -1972, ज़िन्दगी़नामा -1979, दिलोदानिश -1993, समय सरगम -2000
गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान -2017 (निजी जीवन को स्पर्श करती औपन्यासिक रचना)
विचार-संवाद-संस्मरण- हम हशमत (तीन भागों में), सोबती एक सोहबत, शब्दों के आलोक में, सोबती वैद संवाद, मुक्तिबोध : एक व्यक्तित्व सही की तलाश में -2017, लेखक का जनतंत्र -2018, मार्फ़त दिल्ली -2018
यात्रा-आख्यान- बुद्ध का कमण्डल : लद्दाख़

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