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टिप्पणियाँ

mahesh prajapat jeeyaberi ने कहा…
Very very good storis..
Mahesh prajapat jeeyaberi
900 17 13 505
Unknown ने कहा…
very good site .
Unknown ने कहा…
I like your work..may god bless you
Ravi ने कहा…
where is "suraj ka satwa ghoda" ?
Unknown ने कहा…
Very good work. Add some more stories. "Andheri nagri chopat raja"
Unknown ने कहा…
Very good work. Add some more stories. " Andheri Nagri Chopat Raja......etc.
Unknown ने कहा…
I love ur site. It is useful for all age .
Unknown ने कहा…
Too Excellent. Awesome Stories Written by Premchand Ji.
Unknown ने कहा…
बहुत सुंदर रचनाअों के संकलन पर साधुवाद,... जय हिंद जय भारत
Unknown ने कहा…
very fine story

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स्व. पंडित प्रताप नारायण मिश्र

स्व. पंडित प्रताप नारायण मिश्र प्रतापनारायण मिश्र (सितंबर, 1856 - जुलाई, 1894) भारतेंन्दु मंडल के प्रमुख लेखक, कवि और पत्रकार थे। पंडित जी का जन्म उन्नाव जिले के अंतर्गत बैजे गाँव निवासी, कात्यायन गोत्रीय, कान्यकुब्ज ब्राहृमण पं. संकटादीन के घर आश्विनी कृष्ण नौमी को संवत 1913 वि. में हुआ था।वह भारतेंदु निर्मित एवं प्रेरित हिंदी लेखकों की सेना के महारथी, उनके आदर्शो के अनुगामी और आधुनिक हिंदी भाषा तथा साहित्य के निर्माणक्रम में उनके सहयोगी थे। भारतेंदु पर उनकी अनन्य श्रद्धा थी, वह अपने को उनका शिष्य कहते तथा देवता की भाँति उनका स्मरण करते थे। भारतेंदु जैसी रचनाशैली, विषयवस्तु और भाषागत विशेषताओं के कारण मिश्र जी "प्रतिभारतेंदु" अथवा "द्वितीयचंद्र" कहे जाने लगे थे। बड़े होने पर वह पिता के साथ कानपुर में रहने लगे और अक्षरारंभ के पश्चात् उनसे ही ज्योतिष पढ़ने लगे। किंतु उधर रुचि न होने से पिता ने उन्हें अँगरेजी मदरसे में भरती करा दिया। तब से कई स्कूलों का चक्कर लगाने पर भी वह पिता की लालसा के विपरीत पढ़ाई लिखाई से विरत ही रहे और पिता की मृत्यु के पश्चात् 18-19 वर्ष

पदुमलाल पन्नालाल बख्शी

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