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Showing posts from April, 2010

आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था

आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था
आया जो मेरे सामने मेरा ग़ुरूर था

वो थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था
आता न था नज़र को नज़र का क़ुसूर था

कोई तो दर्दमंदे-दिले-नासुबूर था
माना कि तुम न थे, कोई तुम-सा ज़रूर था

लगते ही ठेस टूट गया साज़े-आरज़ू
मिलते ही आँख शीशा-ए-दिल चूर-चूर था

ऐसा कहाँ बहार में रंगीनियों का जोश
शामिल किसी का ख़ूने-तमन्ना ज़रूर था

साक़ी की चश्मे-मस्त का क्या कीजिए बयान
इतना सुरूर था कि मुझे भी सुरूर था

जिस दिल को तुमने लुत्फ़ से अपना बना लिया
उस दिल में इक छुपा हुआ नश्तर ज़रूर था

देखा था कल ‘जिगर’ को सरे-राहे-मैकदा
इस दर्ज़ा पी गया था कि नश्शे में चूर था जिगर मुरादाबादी

इश्क़ की दास्तान है प्यारे

इश्क़ की दास्तान है प्यारे इश्क़ की दास्तान है प्यारे
अपनी-अपनी ज़ुबान है प्यारे

हम ज़माने से इंतक़ाम तो लें
एक हसीं दर्मियान है प्यारे

तू नहीं मैं हूं मैं नहीं तू है
अब कुछ ऐसा गुमान है प्यारे

रख क़दम फूँक-फूँक कर नादान
ज़र्रे-ज़र्रे में जान है प्यारे

जिगर मुरादाबादी

Hindi: The language of songs |

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Hindi: The language of songsहिंदी : गानों की भाषा , किसानों की भाषा , विद्वानों की भाषा  

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हनुमान चालीसा : Hanuman chalisa

हनुमान  चालीसा
।।दोहा।।
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार |
बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि ||
बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार |
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार||

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर
रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा
महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा
हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे
शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन
विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया
सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे
लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई
सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा
जम कुबेर दिगपाल कहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा
तुम्हरो मन्त्र विभीषन मा…