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Mannu Bhandari | मन्नू भंडारी

मन्नू भंडारी (जन्म ३ अप्रैल १९३१) हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं। मध्य प्रदेश में मंदसौर जिले के भानपुरा गाँव में जन्मी मन्नू का बचपन का नाम महेंद्र कुमारी था। लेखन के लिए उन्होंने मन्नू नाम का चुनाव किया। उन्होंने एम ए तक शिक्षा पाई और वर्षों तक दिल्ली के मीरांडा हाउस में अध्यापिका रहीं। धर्मयुग में धारावाहिक रूप से प्रकाशित उपन्यास आपका बंटी से लोकप्रियता प्राप्त करने वाली मन्नू भंडारी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचंद सृजनपीठ की अध्यक्षा भी रहीं। लेखन का संस्कार उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता सुख सम्पतराय भी जाने माने लेखक थे।
प्रमुख कृतियाँकहानीएक प्लेट सैलाब (१९६२)मैं हार गई (१९५७),तीन निगाहों की एक तस्वीर,यही सच है (१९६६),त्रिशंकु'आंखों देखा झूठ'उपन्यास`आपका बंटी' (१९७१)`एक इंच मुस्कान'(१९६२)नाटक `बिना दीवारों का घर' (१९६६) विवाह विच्छेद की त्रासदी में पिस रहे एक बच्चे को केंद्र में रखकर लिखा गया उनका उपन्यास `आपका बंटी' (१९७१) हिन्दी के सफलतम उपन्यासों में गिना जाता है। लेखक और पति राजेंद्र यादव के साथ लिखा गया उनका उपन्यास `एक इंच मुस्कान&…

हरिशंकर परसाई

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मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी नामक गाँव में 22 अगस्त 1924 को जन्मे हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य की प्रगतिशील परम्परा के प्रतिनिधि रचनाकार हैं। जीवन के अनेक अभावों से संघर्ष करते हुए नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. और फिर डिप्लोमा इन टीचिंग की उपाधि लेकर हरिशंकर परसाई ने सर्वप्रथम ताकू (इटारसी) के जंगल विभाग में नौकरी करने के बाद 6 महीने खंडवा में अध्यापन कार्य किया।

लगभग सोलह-सत्रह वर्षों तक अनेक विद्यालयों में अध्यापन करने के पश्चात नौकरी से सदा के लिए अवकाश लेकर जीवन पर्यंत स्वतंत्र लेखन किया। परसाई जी ने साहित्य और लेखन को मात्र आजीविका का साधन कभी नहीं माना। इसे वे एक जन-प्रतिबद्ध कार्य मानते रहे। इसीलिए सन् 1956 में 'वसुधा नामक साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन और सम्पादन किया तथा आर्थिक नुकसान के बावजूद सन् 1958 तक वे इसे लगातार निकालते रहे। आज भी हिंदी साहित्य जगत में 'वसुधा' को उसमें छपने वाली साहित्यिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। परसाई जी के महत्त्वपूर्ण साहित्यिक अवदान के लिए जबलपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की मानद उपाधि प्रदान की। सन् 1982 मे…

सोहन लाल द्विवेदी

सोहन लाल द्विवेदी (22 फरवरी 1906 - 1 मार्च 1988) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि हैं। द्विवेदी जी हिन्दी के राष्ट्रीय कवि के रूप में प्रतिष्ठित हुए। ऊर्जा और चेतना से भरपूर रचनाओं के इस रचयिता को राष्ट्रकवि की उपाधि से अलंकृत किया गया। महात्मा गांधी के दर्शन से प्रभावित, द्विवेदी जी ने बालोपयोगी रचनाएँ भी लिखीं। 1969 में भारत सरकार ने आपको पद्मश्री उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया था।
22 फरवरी सन् 1906 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की तहसील बिन्दकी नामक स्थान पर जन्मे सोहनलाल द्विवेदी हिंदी काव्य-जगत की अमूल्य निधि हैं। उन्होंने हिन्दी में एम.ए. तथा संस्कृत का भी अध्ययन किया। राष्ट्रीयता से संबन्धित कविताएँ लिखने वालो में इनका स्थान मूर्धन्य है। महात्मा गांधी पर आपने कई भाव पूर्ण रचनाएँ लिखी है, जो हिन्दी जगत में अत्यन्त लोकप्रिय हुई हैं। आपने गांधीवाद के भावतत्व को वाणी देने का सार्थक प्रयास किया है तथा अहिंसात्मक क्रान्ति के विद्रोह व सुधारवाद को अत्यन्त सरल सबल और सफल ढंग से काव्य बनाकर 'जन साहित्य' बनाने के लिए उसे मर्मस्पर्शी और मनोरम बना दिया है।
सन् 1941 में देश प्रेम से लबरेज भ…