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Hindi: The language of songs |

Hindi: The language of songs हिंदी : गानों की भाषा , किसानों की भाषा , विद्वानों की भाषा   इस वेबसाइट को जरुर देखे  http://www.cs.colostate.edu/~malaiya/hindiint.html more लिंक्स:  http://www.cs.colostate.edu/~malaiya/hindipoets. html      हिंदी कवि http://www.cs.colostate.edu/~malaiya/hindilinks.html http://www.cs.colostate.edu/~malaiya/hindisongs.html  हिंदी गाने 

हनुमान चालीसा : Hanuman chalisa

हनुमान  चालीसा ।।दोहा।। श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार | बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि || बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार | बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार|| जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा जम कुबेर दिगपाल कहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा तु

भवानी प्रसाद मिश्र

भवानी प्रसाद मिश्र'   (२९ मार्च १९१३-२०फरवरी १९८५) का जन्म गांव टिगरिया, तहसील सिवनी मालवा, जिला होशंगाबाद में हुआ था। वे हिन्दी के प्रमुख कवियों में से एक थे। क्रमश: सोहागपुर, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर में उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई तथा १९३४-३५ में उन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत विषय लेकर बी ए पास किया। गांधी जी के विचारों के अनुसार शिक्षा देने के विचार से एक स्कूल खोलकर शुरू किया और उस स्कूल को चलाता हुए ही १९४२ में गिरफ्तार होकर १९४५ में छूटे। उसी वर्ष महिलाश्रम वर्धा में शिक्षक की तरह चले गए और चार पाँच साल वर्धा में बिताए। कविताएँ लिखना लगभग १९३० से नियमित प्रारम्भ हो गया था और कुछ कविताएँ पंडित ईश्वरी प्रसाद वर्मा के सम्पादन में निकलने वाले हिन्दूपंच में हाईस्कूल पास होने के पहले ही प्रकाशित हो चुकी थीं। सन १९३२-३३ में वे माखनलाल चतुर्वेदी के संपर्क में आए और वे आग्रहपूर्वक कर्मवीर में भवानी प्रसाद मिश्र की कविताएँ प्रकाशित करते रहे। हंस में काफी कविताएँ छपीं और फिर अज्ञेय जी ने दूसरे सप्तक में इन्हे प्रकाशित किया। दूसरे सप्तक के प्रकाशन के बाद प्रकाशन क्रम ज्यादा

Digital Library of India | भारतीय डिजिटल पुस्तकालय

  भारतीय डिजिटल पुस्तकालय  का वेब पता :  http://www.new.dli.ernet.in/ यहाँ पर ढेर  सारी  किताबे उपलब्ध है पढ़ने के लिए ,  किताबों की सूची : Download list with links

मातृभाषा

जैसे चींटियाँ लौटती हैं बिलों में कठफोड़वा लौटता है काठ के पास वायुयान लौटते हैं एक के बाद एक लाल आसमान में डैने पसारे हुए हवाई-अड्डे की ओर ओ मेरी भाषा मैं लौटता हूँ तुम में जब चुप रहते-रहते अकड़ जाती है मेरी जीभ दुखने लगती है मेरी आत्मा --केदारनाथ सिंह

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जन्म: 15 अप्रैल 1865 निधन: 16 मार्च 1947 उपनाम : हरिऔध जन्म स्थान : निज़ामाबाद, आज़मगढ़ कुछ प्रमुख कृतियाँ: प्रिय प्रवास, वैदेही वनवास, रस कलश, प्रेमाम्बु प्रवाह, चौखे चौपदे, चुभते चौपदे विविध :अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध को खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्यकार माना जाता है।