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सब जीवन बीता जाता है

सब जीवन बीता जाता है सब जीवन बीता जाता है धूप छाँह के खेल सदॄश सब जीवन बीता जाता है समय भागता है प्रतिक्षण में , नव - अतीत के तुषार - कण में , हमें लगा कर भविष्य - रण में , आप कहाँ छिप जाता है सब जीवन बीता जाता है बुल्ले , नहर , हवा के झोंके , मेघ और बिजली के टोंके , किसका साहस है कुछ रोके , जीवन का वह नाता है सब जीवन बीता जाता है वंशी को बस बज जाने दो , मीठी मीड़ों को आने दो , आँख बंद करके गाने दो जो कुछ हमको आता है सब जीवन बीता जाता है . जयशंकर प्रसाद register free domain here

एक तिनका

एक तिनका मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ, एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा। आ अचानक दूर से उड़ता हुआ, एक तिनका आँख में मेरी पड़ा। मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन-सा, लाल होकर आँख भी दुखने लगी। मूँठ देने लोग कपड़े की लगे, ऐंठ बेचारी दबे पॉंवों भागने लगी। जब किसी ढब से निकल तिनका गया, तब 'समझ' ने यों मुझे ताने दिए। ऐंठता तू किसलिए इतना रहा, एक तिनका है बहुत तेरे लिए। अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

श्री रामचरित मानस

श्री रामचरित मानस पारायण विधि">00 पारायण विधि बालकाण्ड">01 बालकाण्ड अयोध्याकाण्ड">02 अयोध्याकाण्ड अरण्यकाण्ड">03 अरण्यकाण्ड किष्किन्धाकाण्ड">04 किष्किन्धाकाण्ड सुन्दरकाण्ड">05 सुन्दरकाण्ड लंकाकाण्ड">06 लंकाकाण्ड उत्तरकाण्ड">07 उत्तरकाण्ड मानस के सिद्ध स्तोत्रों के अनुभूत प्रयोग">मानस के सिद्ध स्तोत्रों के अनुभूत प्रयोग 'रामचरित मानस के चमत्कारिक मंत्र'- भाग १ भाग २ MP3 T-series सिंगर : हरिओम सरन एंड कोरस ओनलाइन पढ़े श्री रामचरित मानस कविता कोश पर IIT Kanpur Download From Gita Press Gorakhpur wiki Download PDFs from IIT Kanpur लिंक अन्य वैदिक ग्रन्थ

    हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।   दुष्यंत कुमार

कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया

वो लोग बहुत ख़ुशक़िस्मत थे जो इश्क़ को काम समझते थे या काम से आशिक़ी करते थे हम जीते जी मसरूफ़ रहे कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया काम इश्क़ के आड़े आता रहा और इश्क़ से काम उलझता रहा फिर आख़िर तंग आकर हम ने दोनों को अधूरा छोड़ दिया   फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

नींद आती ही नहीं

नींद आती ही नहीं नींद आती ही नहीं धड़के की बस आवाज़ से तंग आया हूँ मैं इस पुरसोज़ दिल के साज से दिल पिसा जाता है उनकी चाल के अन्दाज़ से हाथ में दामन लिए आते हैं वह किस नाज़ से सैकड़ों मुरदे जिलाए ओ मसीहा नाज़ से मौत शरमिन्दा हुई क्या क्या तेरे ऐजाज़ से बाग़वां कुंजे कफ़स में मुद्दतों से हूँ असीर अब खुलें पर भी तो मैं वाक़िफ नहीं परवाज़ से कब्र में राहत से सोए थे न था महशर का खौफ़ वाज़ आए ए मसीहा हम तेरे ऐजाज़ से बाए गफ़लत भी नहीं होती कि दम भर चैन हो चौंक पड़ता हूँ शिकस्तः होश की आवाज़ से नाज़े माशूकाना से खाली नहीं है कोई बात मेरे लाश को उठाए हैं वे किस अन्दाज़ से कब्र में सोए हैं महशर का नहीं खटका ‘रसा’ चौंकने वाले हैं कब हम सूर की आवाज़ से भारतेंदु हरिश्वंद्र

गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तकें

गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तकें गीताप्रेस गोरखपुर व्यक्तिगत उपयोग के लिए कुछ पुस्तकें मुफ्त डाऊनलोड के लिए उपलब्ध करता है। इसकी सारणी नीचे दी जारही है। आप गीताप्रेस गोरखपुर की वेबसाइट से भी देख सकते है। English Publication Hindi & Sanskrit Publications Code 18 ShrimadBhagwatGita (with Hindi Translation) - PDF File (All Pages) updated 10/06/2008 Code 1014 ShrimadBhagwatGita Sadhak Sanjivani - Sadhak Sanjivani Start Page Sadhak Sanjivani - 1 Sadhak Sanjivani - 2 Sadhak Sanjivani - 3 Sadhak Sanjivani - 4 Sadhak Sanjivani - 5 Sadhak Sanjivani - 6 Sadhak Sanjivani - 7 Sadhak Sanjivani - 8 Sadhak Sanjivani - 9 Sadhak Sanjivani - 10 Sadhak Sanjivani - 11 Sadhak Sanjivani - 12