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संदेश

जागो प्यारे

उठो लाल अब आँखें खोलो, पानी लाई हूँ, मुँह धो लो । बीती रात कमल-दल फूले, उनके ऊपर भौंरे झूले । चिड़ियाँ चहक उठी पेड़ों पर, बहने लगी हवा अति सुन्दर । नभ में न्यारी लाली छाई, धरती ने प्यारी छवि पाई । भोर हुआ सूरज उग आया, जल में पड़ी सुनहरी छाया । ऐसा सुन्दर समय न खोओ, मेरे प्यारे अब मत सोओ । -अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Short stories by मुंशी प्रेमचंद

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कबीर ग्रंथावली

महान भाषाविद् तथा मूर्द्धन्य साहित्यकार डॉ. श्यामसुन्दर दास द्वारा सम्पादित कबीर ग्रंथावली महाकवि संत कबीरदास के विराट काव्य-सर्जना संसार का प्रामाणिक एवं समेकित प्रकाशन है। सुधि जन  इस महाग्रंथ को कम्पुटर /लैपटॉप/ आई पेड / किंडल इत्यादि पर पढ़ सकते है ।              Read Online (53.9 M)           PDF (77.4 M) PDF with text (404.7 K)    EPUB                   Kindle                          Daisy (650.9 K) Full Text (56.4 M) DjVu ये फ़ाइल  Torrent से भी डाउनलोड कर सकते है ।    

कोयल

काली-काली कू-कू करती, जो है डाली-डाली फिरती! कुछ अपनी हीं धुन में ऐंठी  छिपी हरे पत्तों में बैठी जो पंचम सुर में गाती है वह हीं कोयल कहलाती है. जब जाड़ा कम हो जाता है  सूरज थोड़ा गरमाता है  तब होता है समा निराला  जी को बहुत लुभाने वाला हरे पेड़ सब हो जाते हैं  नये नये पत्ते पाते हैं कितने हीं फल औ फलियों से नई नई कोपल कलियों से भली भांति वे लद जाते हैं बड़े मनोहर दिखलाते हैं रंग रंग के प्यारे प्यारे  फूल फूल जाते हैं सारे बसी हवा बहने लगती है  दिशा सब महकने लगती है तब यह मतवाली होकर  कूक कूक डाली डाली पर अजब समा दिखला देती है सबका मन अपना लेती है लडके जब अपना मुँह खोलो तुम भी मीठी बोली बोलो इससे कितने सुख पाओगे सबके प्यारे बन जाओगे. - अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

Munshi Premchand - Mansarovar | लघु कथाएँ

लघु कथाएँ Short stories by katha samrat Munsi Premchand - eight volume collection Vol 1 (1.4 M) PDF Vol 2 (1.5 M) PDF Vol 3 (1.7 M) PDF Vol 4 (1.7 M) PDF Vol 5 (1.7 M) PDF Vol6 (1.8 M) PDF Vol 7 (995.2 K) PDF Vol 8 (1.6 M) PDF