सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Novels by Munshi Premchand | मुंशी प्रेमचंद ke उपन्यास

   मुंशी प्रेमचंद ke उपन्यास
 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हिन्दी की किताबे | Read hindi stories online

Image via Wikipedia हिन्दी की किताबे पुरानी पोस्ट : क्लिक करें हिन्दी की किताबे माँ - कहानी (प्रेमचंद) ईदगाह - कहानी (प्रेमचंद) अलग्योझा - कहानी (प्रेमचंद) इस्तीफा - कहानी (प्रेमचंद) कप्तान साहब -कहानी (प्रेमचंद) प्रायश्चित - कहानी (प्रेमचंद) बैंक का दिवाला - कहानी (प्रेमचंद) शान्ति - कहानी (प्रेमचंद) समर-यात्रा - कहानी (प्रेमचंद) मैकू - कहानी (प्रेमचंद) झाँकी - कहानी (प्रेमचंद) पूस की रात -कहानी (प्रेमचंद) ठाकुर का कुआँ -कहानी (प्रेमचंद) स्वामिनी - कहानी (प्रेमचंद) नाग-पूजा -कहानी (प्रेमचंद) शंखनाद - कहानी (प्रेमचंद) दुर्गा का मन्दिर - कहानी (प्रेमचंद) आत्माराम - कहानी (प्रेमचंद) पंच परमेश्वर - कहानी (प्रेमचंद) बड़े घर की बेटी - कहानी (प्रेमचंद) चतुर नाई (बाल-कहानी) रत्ना भाई (बाल-कहानी) कंजूस सेठ (कहानी) मुर्ख बहु (बाल-कहानी) आनंदी कौआ (बाल-कहानी) मुर्ख कौआ (बाल-कहानी) तिवारी जी (कहानी) नकलची नाई (कहानी) करामाती तुम्बी (बाल-कहानी) बोहरा और बोहरी (बाल-कहानी) चतुर खरगोश - बाल-कहानी कुनबी और कुनबिन- कहानी चोर और राजा (कहानी) कौआ और मैना (बाल-कहानी) गिलहरीबाई (बाल-कहानी...

Tehreer...Munshi Premchand Ki | तहरीर मुंशी प्रेमचंद की

मुंशी प्रेमचंद : जन्म- 31 जुलाई, 1880 - मृत्यु- 8 अक्टूबर, 1936 प्रेमचंद एक क्रांतिकारी रचनाकार थे, उन्होंने न केवल देशभक्ति बल्कि समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों को देखा और उनको कहानी के माध्यम से पहली बार लोगों के समक्ष रखा। उन्होंने उस समय के समाज की जो भी समस्याएँ थीं उन सभी को चित्रित करने की शुरुआत कर दी थी। उसमें दलित भी आते हैं, नारी भी आती हैं। ये सभी विषय आगे चलकर हिन्दी साहित्य के बड़े विमर्श बने। प्रेमचंद हिन्दी सिनेमा के सबसे अधिक लोकप्रिय साहित्यकारों में से हैं। सत्यजित राय ने उनकी दो कहानियों पर यादगार फ़िल्में बनाईं। १९७७ में शतरंज के खिलाड़ी और १९८१ में सद्गति। उनके देहांत के दो वर्षों बाद के सुब्रमण्यम ने १९३८ में सेवासदन उपन्यास पर फ़िल्म बनाई जिसमें सुब्बालक्ष्मी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। १९७७ में मृणाल सेन ने प्रेमचंद की कहानी कफ़न पर आधारित ओका ऊरी कथा नाम से एक तेलुगू फ़िल्म बनाई जिसको सर्वश्रेष्ठ तेलुगू फ़िल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। १९६३ में गोदान और १९६६ में गबन उपन्यास पर लोकप्रिय फ़िल्में बनीं। १९८० में उनके उपन्यास पर बना टीवी धारावाहिक निर्मला भ...

पदुमलाल पन्नालाल बख्शी

डॉ॰ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (27 मई 1894-28 दिसम्बर 1971) जिन्हें ‘मास्टरजी’ के नाम से भी जाना जाता है, हिंदी के निबंधकार थे। वे राजनंदगांव की हिंदी त्रिवेणी की तीन धाराओं में से एक हैं। राजनांदगांव के त्रिवेणी परिसर में इनके सम्मान में मूर्तियों की स्थापना की गई है। पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म राजनांदगांव के एक छोटे से कस्‍बे खैरागढ़ में 27 मई 1894 में हुआ। उनके पिता पुन्नालाल बख्शी खैरागढ़ के प्रतिष्ठित परिवार से थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा म.प्र. के प्रथम मुख्‍यमंत्री पं॰ रविशंकर शुक्‍ल जैसे मनीषी गुरूओं के सानिध्‍य में विक्‍टोरिया हाई स्‍कूल, खैरागढ में हुई थी। प्रारंभ से ही प्रखर पदुमलाल पन्‍नालाल बख्‍शी की प्रतिभा को खैरागढ के ही इतिहासकार लाल प्रद्युम्‍न सिंह जी ने समझा एवं बख्‍शी जी को साहित्‍य सृजन के लिए प्रोत्‍साहित किया और यहीं से साहित्‍य की अविरल धारा बह निकली। प्रतिभावान बख्‍शी जी ने बनारस हिन्‍दू कॉलेज से बी.ए. किया और एल.एल.बी. करने लगे किन्‍तु वे साहित्‍य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता एवं समयाभाव के कारण एल.एल.बी. पूरा नहीं कर पाए। यह 1903 का समय था जब वे घर के साहित्...