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सब जीवन बीता जाता है

सब जीवन बीता जाता है

सबजीवनबीताजाताहै
धूपछाँहकेखेलसदॄश
सबजीवनबीताजाताहै

समयभागताहैप्रतिक्षणमें,
नव-अतीतकेतुषार-कणमें,
हमेंलगाकरभविष्य-रणमें,
आपकहाँछिपजाताहै
सबजीवनबीताजाताहै

बुल्ले, नहर, हवाकेझोंके,
मेघऔरबिजलीकेटोंके,
किसकासाहसहैकुछरोके,
जीवनकावहनाताहै
सबजीवनबीताजाताहै

वंशीकोबसबजजानेदो,
मीठीमीड़ोंकोआनेदो,
आँखबंदकरकेगानेदो
जोकुछहमकोआताहै

सबजीवनबीताजाताहै.

जयशंकर प्रसाद
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एक तिनका

एक तिनका



मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ,

एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा।

आ अचानक दूर से उड़ता हुआ,

एक तिनका आँख में मेरी पड़ा।


मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन-सा,

लाल होकर आँख भी दुखने लगी।

मूँठ देने लोग कपड़े की लगे,

ऐंठ बेचारी दबे पॉंवों भागने लगी।


जब किसी ढब से निकल तिनका गया,

तब 'समझ' ने यों मुझे ताने दिए।

ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,

एक तिनका है बहुत तेरे लिए।







अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

श्री रामचरित मानस