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Showing posts from June, 2008

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।दुष्यंत कुमार

कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया

वो लोग बहुत ख़ुशक़िस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिक़ी करते थे
हम जीते जी मसरूफ़ रहे
कुछ इश्क़ किया कुछ काम कियाकाम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आख़िर तंग आकर हम ने
दोनों को अधूरा छोड़ दियाफ़ैज़ अहमद फ़ैज़

नींद आती ही नहीं

नींद आती ही नहींनींद आती ही नहीं धड़के की बस आवाज़ से तंग आया हूँ मैं इस पुरसोज़ दिल के साज से दिल पिसा जाता है उनकी चाल के अन्दाज़ से हाथ में दामन लिए आते हैं वह किस नाज़ से सैकड़ों मुरदे जिलाए ओ मसीहा नाज़ से मौत शरमिन्दा हुई क्या क्या तेरे ऐजाज़ से बाग़वां कुंजे कफ़स में मुद्दतों से हूँ असीर अब खुलें पर भी तो मैं वाक़िफ नहीं परवाज़ से कब्र में राहत से सोए थे न था महशर का खौफ़ वाज़ आए ए मसीहा हम तेरे ऐजाज़ से बाए गफ़लत भी नहीं होती कि दम भर चैन हो चौंक पड़ता हूँ शिकस्तः होश की आवाज़ से नाज़े माशूकाना से खाली नहीं है कोई बात मेरे लाश को उठाए हैं वे किस अन्दाज़ से कब्र में सोए हैं महशर का नहीं खटका ‘रसा’ चौंकने वाले हैं कब हम सूर की आवाज़ सेभारतेंदु हरिश्वंद्र

गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तकें

गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तकें
गीताप्रेस गोरखपुर व्यक्तिगत उपयोग के लिए कुछ पुस्तकें मुफ्त डाऊनलोड के लिए उपलब्ध करता है।
इसकी सारणी नीचे दी जारही है। आप गीताप्रेसगोरखपुरकीवेबसाइटसे भी देख सकते है।

English Publication
Hindi & Sanskrit Publications

Code 18
ShrimadBhagwatGita (with Hindi Translation) -

PDF File(All Pages)updated 10/06/2008

Code 1014
ShrimadBhagwatGita Sadhak Sanjivani -


Sadhak Sanjivani Start Page Sadhak Sanjivani - 1 Sadhak Sanjivani - 2 Sadhak Sanjivani - 3 Sadhak Sanjivani - 4 Sadhak Sanjivani - 5 Sadhak Sanjivani - 6 Sadhak Sanjivani - 7 Sadhak Sanjivani - 8 Sadhak Sanjivani - 9 Sadhak Sanjivani - 10 Sadhak Sanjivani - 11 Sadhak Sanjivani - 12 Sadhak Sanjivani - 13 Sadhak Sanjivani - 14 Sadhak Sanjivani - 15 Sadhak Sanjivani - 16 Sadhak Sanjivani - 17 Sadhak Sanjivani - 18

Year 2001 Kalyan Special -

Aarogya Prapti Aarogya Sadhan…

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सद्विचार




इस संसार में प्यार करने लायक दो वस्तुएँ हैं-एक दुःख और दूसरा श्रम । दुख के बिना हृदय निर्मल नहीं होता और श्रम के बिना मनुष्यत्व का विकास नहीं होता । ज्ञान का अर्थ है-जानने की शक्ति । झूठ को सच से पृथक् करने वाली जो विवेक बुद्धि है-उसी का नाम ज्ञान है । अध्ययन, विचार, मनन, विश्वास एवं आचरण द्वार जब एक मार्ग को मजबूती से पकड़ लिया जाता है, तो अभीष्ट उद्देश्य को प्राप्त करना बहुत सरल हो जाता है ।आदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है ।कुचक्र, छद्म और आतंक के बलबूते उपार्जित की गई सफलताएँ जादू के तमाशे में हथेली पर सरसों जमाने जैसे चमत्कार दिखाकर तिरोहित हो जाती हैं । बिना जड़ का पेड़ कब तक टिकेगा और किस प्रकार फलेगा-फूलेगा । जो दूसरों को धोखा देना चाहता है, वास्तव में वह अपने आपको ही धोखा देता है । समर्पण का अर्थ है-पूर्णरूपेण प्रभु को हृदय में स्वीकार करना, उनकी इच्छा, प्रेरणाओं के प्रति सदैव जागरूक रहना और जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे परिणत करते रहना । मनोविकार भले ही छोटे हों या बड़े, य…