Ek Khali Jagah by Amrita Pritam

Ek Khali Jagah (Hindi) by Amrita Pritam https://amzn.to/3pkM5Kb  अमृता प्रीतम एक विदुषी लेखिका हैं जो अपनी कहानियों के जरिए जीवन की व्यथाओं और उससे निकलने के तरीकों को बताती हैं। 'एक  खाली जगह'  एक बेहद गहरी कहानी है जो आपके मन को छू जाएगी। दिलीप राय के जीवन की एक जगह मुक्ता के लिए होने के बावजूद, उसे कई सामान्य चीजों से वंचित कर दिया जाता है। इस कहानी में मुक्ता अपनी ज़िन्दगी के तंग रास्तों से गुज़रती है और दिलीप राय के रास्ते पर चलते हुए उसे समझने और स्वीकार करने की कोशिश करती है। यह कहानी एक आम लड़की के जीवन की समस्याओं को बताती है जिसे एक अमीर लड़के की तलाश होती है। इसके अलावा, यह एक महिला की आत्मसम्मान के संघर्ष को भी दर्शाती है। यह कहानी एक आम लड़की के जीवन की समस्याओं को बताती है जिसे एक अमीर लड़के की तलाश होती है। इसके अलावा, यह एक महिला की आत्मसम्मान के संघर्ष को भी दर्शाती है। इस कहानी में अमृता प्रीतम ने समाज की धार्मिकता, जाति वाद, लिंग भेद, गरीबी और समाज के अन्य विषयों को बहुत सुव्यवस्थित तरीके से बताया है। मुक्ता ने अपनी गरीबी क...

कहानी (प्रेमचंद)

माँ - कहानी (प्रेमचंद) आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षो में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पॉँच रूपये जमा कर रखे थे, वह सब पति के सत्कार और स्वागत की तैयारियों में खर्च कर दिए। पति के लिए धोतियों का नया जोड़ा लाई थी, नए कुरते बनवाए थे, बच्चे के लिए नए कोट और टोपी की आयोजना की थी। बार-बार बच्चे को गले लगाती ओर प्रसन्न होती। अगर इस बच्चे ने सूर्य की भॉँति उदय होकर उसके अंधेरे जीवन को प्रदीप्त न कर दिया होता, तो कदाचित् ठोकरों ने उसके जीवन का अन्त कर दिया होता। पति के कारावास-दण्ड के तीन ही महीने बाद इस बालक का जन्म हुआ। उसी का मुँह देख-देखकर करूणा ने यह तीन साल काट दिए थे। वह सोचती—जब मैं बालक को उनके सामने ले जाऊँगी, तो वह कितने प्रसन्न होंगे! उसे देखकर पहले तो चकित हो जाऍंगे, फिर गोद में उठा लेंगे और कहेंगे—करूणा, तुमने यह रत्न देकर मुझे निहाल कर दिया। कैद के सारे कष्ट बालक की तोतली बातों में भूल जाऍंगे, उनकी एक सरल, पवित्र, मोहक दृष्टि दृदय की सारी व्यवस्थाओं को धो डालेगी। इस कल्पना का आन्नद लेकर वह फूली न समाती थी। वह सोच रही थी—आ...

Mridula Garg | मृदुला गर्ग

मृदुला गर्ग   (जन्म:२५ अक्टूबर, १९३८) कोलकाता में जन्मी, हिंदी की सबसे लोकप्रिय लेखिकाओं में से एक हैं। उपन्यास, कहानी संग्रह, नाटक तथा निबंधसंग्रह सब मिलाकर उन्होंने २० से अधिक पुस्तकों की रचना की है। १९६० में अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि लेने के बाद उन्होंने ३ साल तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन भी किया है। उनके उपन्यासों को अपने कथानक की विविधता और नयेपन के कारण समालोचकों की बड़ी स्वीकृति और सराहना मिली। उनके उपन्यास और कहानियों का अनेक हिंदी भाषाओं तथा जर्मन, चेक, जापानी और अँग्रेजी में अनुवाद हुआ है। वे स्तंभकार रही हैं, पर्यावरण के प्रति सजगता प्रकट करती रही हैं तथा महिलाओं तथा बच्चों के हित में समाज सेवा के काम करती रही हैं। उनका उपन्यास 'चितकोबरा' नारी-पुरुष के संबंधों में शरीर को मन के समांतर खड़ा करने और इस पर एक नारीवाद या पुरुष-प्रधानता विरोधी दृष्टिकोण रखने के लिए काफी चर्चित और विवादास्पद रहा था। उन्होंने इंडिया टुडे के हिन्दी संस्करण में २००३ से २०१० तक 'कटाक्ष' नामक स्तंभ लिखा है जो अपने तीखे व्यंग्य के कारण खूब चर्चा में रहा। उनके आठ उपन्...

हिंदी साहित्य की कालजयी और आधुनिक प्रसिद्ध रचनायें - कहानी

उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी हार की जीत – सुदर्शन 'ठाकुर का कुआं', 'सवा सेर गेहूँ', 'मोटेराम का सत्याग्रह', सद्गति, कफ़न – प्रेमचंद टोबा टेक सिंह – सआदत हसन मंटो तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम – फणीश्वर नाथ रेणु पक्षी और दीमक – गजानन माधव मुक्तिबोध चीफ़ की दावत – भीष्म साहनी गुल की बन्नो – धर्मवीर भारती घंटा,बहिर्गमन  – ज्ञानरंजन शरणदाता, विपथगा, और, रोज़ - अज्ञेय

प्रेमचंद की कहानियाँ: वरदान

विन्घ्याचल पर्वत मध्यरात्रि के निविड़ अन्धकार में काल देव की भांति खड़ा था। उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा दे...