Hindi | इश्क़ फुसफुसाया— “मिट जा, तो ही पाएगा।”
मैं ही कर्ता, मैं ही भोक्ता—
यह देह–बुद्धि का जाल रहा।
सत्य कहीं बाहर खोजता,
और भीतर अज्ञान का हाल रहा।
जब विवेक ने माया काटी,
अहंकार का आवरण गिर गया—
ब्रह्म की शांति में मौन हुआ मन,
तभी अंतःस्वर ने यह समझाया—
इश्क़ फुसफुसाया—
“मिट जा, तो ही पाएगा।”
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