शरण

हवा ने कान में मेरे तेरा नाम कहा है,
लगा हर साँस ने शरण का पैग़ाम कहा है।

सूरज ने झुक के पूछा—किस राह पर चलूँ?
किरण ने मुस्करा कर—तेरा नाम कहा है।

नदी ने छोड़ दी अपनी पुरानी सारी राहें,
लहर ने हर किनारे तेरा धाम कहा है।

मैं बोझ ढो रहा था हज़ारों नियमों का,
तूने एक बात में ही सारा अंजाम कहा है।

मेरी अना पिघलकर ओस बन गई श्याम,
तेरे नूर ने हर ग़म को आराम कहा है।

अब न डर, न कोई फ़िक्र रख यहाँ,
तेरी शरण में आना ही मुक़ाम कहा है।