लोकविज्ञान- समकालीन रचनाएँ

शीर्षक : लोकविज्ञान- समकालीन रचनाएँ 
लेखक : कृष्ण कुमार मिश्र
प्रथम संस्करण : मार्च 2006
मूल्य : 50 रू.  पृष्ठ संख्या  :  152
प्रकाशक : होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केन्द्र

सोर्स: http://ehindi.hbcse.tifr.res.in/

विज्ञान - इतिहास के आईने में

ई-शब्दावली

शब्दावली या शब्दकोष का किसी भी भाषा के सीखने समझने में बड़ा योगदान रहा है. आज इस पोस्ट में कुछ ऐसेही शब्दकोष का जिक्र किया गया है

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English-Hindi Glossary
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जीव विज्ञान हेतु लघु पारिभाषिक शब्द-संग्रह




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हिन्दी साहित्य का इतिहास - 03

हिन्दी साहित्य का इतिहास - 02

हिन्दी साहित्य का इतिहास

७५० ईसा पूर्व - संस्कृत का वैदिक संस्कृत के बाद का क्रमबद्ध विकास।
५०० ईसा पूर्व - बौद्ध तथा जैन की भाषा प्राकृत का विकास (पूर्वी भारत)।
४०० ईसा पूर्व - पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण लिखा (पश्चिमी भारत)। वैदिक संस्कृत से पाणिनि की काव्य संस्कृत का मानकीकरण।
संस्कृत का उद्गम

३२२ ईसा पूर्व - मौर्यों द्वारा ब्राह्मी लिपि का विकास।
२५० ईसा पूर्व - आदि संस्कृत का विकास। (आदि संस्कृत ने धीरे धीरे १०० ईसा पूर्व तक प्राकति का स्थान लिया।)
३२० ए. डी. (ईसवी)- गुप्त या सिद्ध मात्रिका लिपि का विकास।
अपभ्रंश तथा आदि-हिन्दी का विकास

४०० - कालीदास ने "विक्रमोर्वशीयम्" अपभ्रंश में लिखी।
५५० - वल्लभी के दर्शन में अपभ्रंश का प्रयोग।
७६९ - सिद्ध सरहपद (जिन्हें हिन्दी का पहला कवि मानते हैं) ने "दोहाकोश" लिखी।
७७९ - उदयोतन सुरी कि "कुवलयमल" में अपभ्रंश का प्रयोग।
८०० - संस्कृत में बहुत सी रचनायें लिखी गईं।
९९३ - देवसेन की "शवकचर" (शायद हिन्दी की पहली पुस्तक)।
११०० - आधुनिक देवनागरी लिपि का प्रथम स्वरूप।
११४५-१२२९ - हेमचंद्राचार्य ने अपभ्रंश-व्याकरण की रचना की।
अपभ्रंश का अस्त तथा आधुनिक हिन्दी का विकास

१२८३ - अमीर ख़ुसरो की पहेली तथा मुकरियाँ में "हिन्दवी" शव्द का सर्वप्रथम उपयोग।
१३७० - "हंसवाली" की आसहात ने प्रेम कथाओं की शुरुआत की।
१३९८-१५१८ - कबीर की रचनाओं ने निर्गुण भक्ति की नींव रखी।
१४००-१४७९ - अपभ्रंश के आखरी महान कवि रघु।
१४५० - रामानन्द के साथ "सगुण भक्ति" की शुरुआत।
१५८० - शुरुआती दक्खिनी का कार्य "कालमितुल हकायत्" -- बुर्हनुद्दिन जनम द्वारा।
१५८५ - नवलदास ने "भक्तमाल" लिखी।
१६०१ - बनारसीदास ने हिन्दी की पहली आत्मकथा "अर्ध कथानक" लिखी।
१६०४ - गुरु अर्जुन देव ने कई कवियों की रचनाओं का संकलन "आदि ग्रन्थ" निकाला।
१५३२-१६२३ - गोस्वामी तुलसीदास ने "रामचरित मानस" की रचना की।
१६२३ - जाटमल ने "गोरा बादल की कथा" (खडी बोली की पहली रचना) लिखी।
१६४३ - आचार्य केशव दास ने "रीति" के द्वारा काव्य की शुरुआत की।
१६४५ - उर्दू का आरंभ
आधुनिक हिन्दी

१७९६ - देवनागरी रचनाओं की शुरुआती छ्पाई।
१८२६ - "उदन्त मार्तण्ड" हिन्दी का पहला साप्ताहिक।
१८३७ - ओम् जय जगदीश के रचयिता श्रद्धाराम फुल्लौरी का जन्म।
१८७७ - अयोध्या प्रसाद खत्री का हिन्दी व्याकरण, (बिहार बन्धु प्रेस)
१८९३ - काशी नागरीप्रचारिणी सभा की स्थापना
१ मई १९१० - नागरी प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई।
१९५० - हिन्दी भारत की राजभाषा के रुप में स्थापित।
१०-१४ जनवरी १९७५ - नागपुर में प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित
दिसम्बर, १९९३ - मॉरीशस में चतुर्थ विश्व हिन्दी सम्मेलन तथा उसके बाद विश्व हिन्दी सचिवालय की स्थापना
१९९७ - वर्धा में महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना का अधिनियम संसद द्वारा पारित
२००० - आधुनिक हिंदी का अंतर्राष्ट्रीय विकास
सन्दर्भ

हिन्दी - उद्भव, विकास और स्वरूप; अष्टम संस्करण, १९८४, पृष्त १५

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा भी न था

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा भी न था
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था

वो के ख़ुश-बू की तरह फैला था चार सू
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था

रात भर पिछली ही आहट कान में आती रही
झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था

मैं तेरी सूरत लिए सारे ज़माने में फिरा
सारी दुनिया में मगर कोई तेरे जैसा न था

ये भी सब वीरानियाँ उस के जुदा होने से थीं
आँख धुँधलाई हुई थी शहर धुंदलाया न था

सैंकड़ों तूफ़ान लफ़्ज़ों में दबे थे ज़ेर-ए-लब
एक पत्थर था ख़ेमोशी का के जो हटता न था

याद कर के और भी तकलीफ़ होती थी 'अदीम'
भूल जाने के सिवा अब कोई भे चारा न था

मस्लेहत ने अजनबी हम को बनाया था 'अदीम'
वरना कब इक दूसरे को हम ने पहचाना न था

--अदीम हाशमी

अधिकार | Adhikar by Mahadevi Verma

वे मुस्काते फूल, नहीं
जिनको आता है मुर्झाना,
वे तारों के दीप, नहीं
जिनको भाता है बुझ जाना;

वे नीलम के मेघ, नहीं
जिनको है घुल जाने की चाह
वह अनन्त रितुराज,नहीं
जिसने देखी जाने की राह|

वे सूने से नयन,नहीं
जिनमें बनते आँसू मोती,
वह प्राणों की सेज,नही
जिसमें बेसुध पीड़ा सोती;

ऐसा तेरा लोक, वेदना
नहीं,नहीं जिसमें अवसाद,
जलना जाना नहीं, नहीं
जिसने जाना मिटने का स्वाद!

क्या अमरों का लोक मिलेगा
तेरी करुणा का उपहार?
रहने दो हे देव! अरे
यह मेरा मिटने का अधिकार!

अधिकार / महादेवी वर्मा

हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध रचनायें


हिन्दी साहित्य के इतिहासकार और उनके ग्रन्थ


हिन्दी साहित्य के मुख्य इतिहासकार और उनके ग्रन्थ निम्नानुसार हैं -

1. गार्सा द तासी : इस्तवार द ला लितेरात्यूर ऐंदुई ऐंदुस्तानी (फ्रेंच भाषा में; फ्रेंच विद्वान, हिन्दी साहित्य के पहले इतिहासकार)

2. शिवसिंह सेंगर : शिव सिंह सरोज

3. जार्ज ग्रियर्सन : द मॉडर्न वर्नेक्यूलर लिट्रैचर आफ हिंदोस्तान

4. मिश्र बंधु : मिश्र बंधु विनोद

5. रामचंद्र शुक्ल : हिंदी साहित्य का इतिहास

6. हजारी प्रसाद द्विवेदी : हिन्दी साहित्य की भूमिका; हिन्दी साहित्य का आदिकाल; हिन्दी साहित्य :उद्भव और विकास

7. रामकुमार वर्मा : हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास

8. डॉ धीरेन्द्र वर्मा : हिन्दी साहित्य

9. डॉ नगेन्द्र : हिन्दी साहित्य का इतिहास; हिन्दी वांड्मय 20वीं शती

10. रामस्वरूप चतुर्वेदी : हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 1986

11. बच्चन सिंह : हिन्दी साहित्य का दूसरा इतिहास, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली

12. डा० मोहन अवस्थी  : हिन्दी साहित्य का अद्यतन इतिहास

13. बाबू गुलाब राय : हिन्दी साहित्य का सुबोध इतिहास