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प्रेम की कविता

सितंबर 10, 2018 ・0 comments
वह मेरी खिड़की के सामने धीरे से बोली-- ‘म्याऊँ’ मैं उस समय सोया हुआ था मुझे लगा मेरी नींद में आ गई है कोई बिल्ली उसकी लम्बी छलांग से ...
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