सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

orkut लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तलाश

एक छंद ऑरकुट से .................. हर नज़र को एक नज़र की तलाश है, हर चेहरे में कुछ तोह एह्साह है, आपसे दोस्ती हम यूँ ही नहीं कर बैठे, क्या करे हमारी पसंद ही कुछ खास है . . चिरागों से अगर अँधेरा दूर होता, तोह चाँद की चाहत किसे होती. कट सकती अगर अकेले जिंदगी, तो दोस्ती नाम की चीज़ ही न होती. कभी किसी से जीकर इ जुदाई मत करना, इस दोस्त से कभी रुसवाई मत करना, जब दिल उठ जाये हमसे तोह बता देना, न बताकर बेवफाई मत करना. दोस्ती सची हो तो वक्त रुक जाता है अस्मा लाख ऊँचा हो मगर झुक जाता है दोस्ती में दुनिया लाख बने रुकावट, अगर दोस्त साचा हो तो खुदा बी झुक जाता है. दोस्ती वोह एहसास है जोह मिट ता नहीं. दोस्ती पर्वत है वोह, जोह झुकता नहीं, इसकी कीमत क्या है पुचो हमसे, यह वोह अनमोल मोती है जोह बिकता नहीं . . . सची है दोस्ती आजमा के देखो, करके यकीं मुझेपे मेरे पास आके देखो, बदलता नहीं कभी सोना अपना रंग, चाहे जितनी बार आग में जला के देखो

कुछ छंद ओरकुट से

तो पेश-ए-खिदमत है , कुछ चुने हुए पद्य , ओरकुट से १ रहो जमीं पे मगर आसमां का ख्वाब रखो तुम अपनी सोच को हर वक्त लाजवाब रखो खड़े न हो सको इतना न सर झुकाओ कभी उभर रहा जो सूरज तो धूप निकलेगी उजालों में रहो, मत धुंध का हिसाब रखो मिले तो ऐसे कि कोई न भूल पाये तुम्हें महक वंफा की रखो और बेहिसाब रखो अक्लमंदों में रहो तो अक्लमंदों की तरह और नादानों में रहना हो रहो नादान से वो जो कल था और अपना भी नहीं था, दोस्तों आज को लेकिन सजा लो एक नयी पहचान से २ खामोशी का मतलब इन्कार नही होता.. नाकामयाबी का मतलब हार नही होता.. क्या हुआ अगर हम उन्हे पा ना सके.. सिर्फ पा लेने का मतलब प्यार नही होता... चाहने से कोई बात नही होती.... थोडे से अंधेरे से रात नही होती.. जिन्हे चाहते है जान से ज्यादा.. उन्ही से आज कल मुलाकात भी नही होती... ३ कभी उनकी याद आती है कभी उनके ख्व़ाब आते हैं मुझे सताने के सलीके तो उन्हें बेहिसाब आते हैं कयामत देखनी हो गर चले जाना उस महफिल में सुना है उस महफिल में वो बेनकाब आते हैं कई सदियों में आती है कोई सूरत हसीं इतनी हुस्न पर हर रोज कहां ऐसे श़बाब आते हैं रौशनी के वास्ते तो उनका