Short stories by मुंशी प्रेमचंद
लेखक:
OSI
Novel | उपन्यास Short stories | कहानियाँ
- Nirmala | निर्मला
- Andher | अन्धेर
- Anaath Lark | अनाथ लड़की
- Apani Karnii | अपनी करनी
- Amrit | अमृत
- Algojhya | अलग्योझा
- Akhiri Tohfa | आख़िरी तोहफ़ा
- Akhiri Manzil | आखिरी मंजिल
- Aatma-sangeet | आत्म-संगीत
- Aatmaram | आत्माराम
- Aadhar | आधार
- Aalha | आल्हा
- Izzat ka Khoon | इज्जत का खून
- Isteefa | इस्तीफा
- Idgah | ईदगाह
- Ishwariya Nyay | ईश्वरीय न्याय
- Uddhar | उद्धार
- Ek Aanch ki Kasar | एक ऑंच की कसर
- Actress | एक्ट्रेस
- Kaptaan Sahib | कप्तान साहब
- Karmon ka Phal | कर्मों का फल
- Cricket Match | क्रिकेट मैच
- Kavach | कवच
- Qaatil | क़ातिल
- Kutsa | कुत्सा
- Koi dukh na ho to bakri kharid laa | कोई दुख न हो तो बकरी खरीद ला
- Kaushal | कौशल़
- Khudi | खुदी
- Gairat ki Kataar | गैरत की कटार
- Gulli Danda | गुल्ली डंडा
- Ghamand Ka putla | घमंड का पुतला
- Jyoti | ज्योति
- Jaadu | जादू
- Jail | जेल
- Juloos | जुलूस
- Jhanki | झांकी
- Thaakur ka Kuan | ठाकुर का कुआं
- Taintar | तेंतर
- Triya Charitra | त्रिया-चरित्र
- Tangewale ke Bar | तांगेवाले की बड़
- Tirsool | तिरसूल
- Dand | दण्ड
- Durga ka Mandir | दुर्गा का मन्दिर
- Devi | देवी
- Devi (another story) | देवी - एक और कहानी
- Doosri Shadi | दूसरी शादी
- Dil ki Rani | दिल की रानी
- Do Bailon Ki Katha | दो बैलों की कथा
- Do sakhiyan | दो सखियाँ
- Dhikkaar | धिक्कार
- Dhikkaar (another story) | धिक्कार - एक और कहानी
- Neur | नेउर
- Neki | नेकी
- Nabi ka Neeti Nirvaah | नबी का नीति-निर्वाह
- Narak ka Marg | नरक का मार्ग
- Nairashya | नैराश्य
- Nairashya Leela | नैराश्य लीला
- Nasha | नशा
- Naseehaton ka Daftar | नसीहतों का दफ्तर
- Naag Puja | नाग-पूजा
- Nadaan Dost | नादान दोस्त
- Nirvaasan | निर्वासन
- Panch Parmeshwar | पंच परमेश्वर
- Patni se Pati | पत्नी से पति
- Putra Prem | पुत्र-प्रेम
- Paipuji | पैपुजी
- Pratishodh | प्रतिशोध
- Prem Sutra | प्रेम-सूत्र
- Parvat Yatra | पर्वत-यात्रा
- Prayashchit | प्रायश्चित
- Pariksha | परीक्षा
- Poos ki Raat | पूस की रात
- Bank ka Diwala | बैंक का दिवाला
- Beton Wali Vidhva | बेटोंवाली विधवा
- Bade Ghar ki Beti | बड़े घर की बेटी
- Bade Babu | बड़े बाबू
- Bade Bhai Sahab | बड़े भाई साहब
- Band Darwaza | बन्द दरवाजा
- Banka Zamindar | बाँका जमींदार
- Bohni | बोहनी
- Maiku | मैकू
- Motor ke Chhinte | मोटर के छींटे
- Mantra | मंत्र
- Mandir aur Masjid | मंदिर और मस्जिद
- Manaavan | मनावन
- Mubarak Bimari | मुबारक बीमारी
- Mamata | ममता
- Ma | माँ
- Mata ka Hriday | माता का ह्रदय
- Milaap | मिलाप
- Mote Ram ji Shastri | मोटेराम जी शास्त्री
- Swarg ki Devi | र्स्वग की देवी
- Rajhath | राजहठ
- Rashtra ka Sevak | राष्ट्र का सेवक
- Laila | लैला
- Vafaa ka Khanjar | वफ़ा का ख़जर
- Vaasna ki Kadiyan | वासना की कड़ियॉँ
- Vijay | विजय
- Vishwas | विश्वास
- Shankhnad | शंखनाद
- Shudra | शूद्र
- Sharaab ki Dukaan | शराब की दुकान
- Shanti | शांति
- Shaadi ki Vajah | शादी की वजह
- Shanti | शान्ति
- Stri Aur Purush | स्त्री और पुरूष
- Svarg ki Devi | स्वर्ग की देवी
- Swaang | स्वांग
- Sabhyata ka Rahasya | सभ्यता का रहस्य
- Samar Yatra | समर यात्रा
- Samasya | समस्या
- Sailani Bandar | सैलानी बंदर
- Swamini | स्वामिनी
- Sirf ek Awaaz | सिर्फ एक आवाज
- Sohag ka Shav | सोहाग का शव
- Saut | सौत
- Holi ki Chhutti | होली की छुट्टी
कबीर ग्रंथावली
लेखक:
OSI
महान भाषाविद् तथा मूर्द्धन्य साहित्यकार डॉ. श्यामसुन्दर दास द्वारा सम्पादित कबीर ग्रंथावली महाकवि संत कबीरदास के विराट काव्य-सर्जना संसार का
प्रामाणिक एवं समेकित प्रकाशन है।
सुधि जन इस महाग्रंथ को कम्पुटर /लैपटॉप/ आई पेड / किंडल इत्यादि पर पढ़ सकते है ।
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(650.9 K)Full Text
(56.4 M)DjVu
ये फ़ाइल Torrent से भी डाउनलोड कर सकते है ।
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कोयल
लेखक:
OSI
काली-काली कू-कू करती,
जो है डाली-डाली फिरती!
कुछ अपनी हीं धुन में ऐंठी
छिपी हरे पत्तों में बैठी
जो पंचम सुर में गाती है
वह हीं कोयल कहलाती है.
जब जाड़ा कम हो जाता है
सूरज थोड़ा गरमाता है
तब होता है समा निराला
जी को बहुत लुभाने वाला
हरे पेड़ सब हो जाते हैं
नये नये पत्ते पाते हैं
कितने हीं फल औ फलियों से
नई नई कोपल कलियों से
भली भांति वे लद जाते हैं
बड़े मनोहर दिखलाते हैं
रंग रंग के प्यारे प्यारे
फूल फूल जाते हैं सारे
बसी हवा बहने लगती है
दिशा सब महकने लगती है
तब यह मतवाली होकर
कूक कूक डाली डाली पर
अजब समा दिखला देती है
सबका मन अपना लेती है
लडके जब अपना मुँह खोलो
तुम भी मीठी बोली बोलो
इससे कितने सुख पाओगे
सबके प्यारे बन जाओगे.
हिंदी की दुर्दशा - काका हाथरसी
लेखक:
OSI
बटुकदत्त से कह रहे, लटुकदत्त आचार्य
सुना? रूस में हो गई है हिंदी अनिवार्य
है हिंदी अनिवार्य, राष्ट्रभाषा के चाचा-
बनने वालों के मुँह पर क्या पड़ा तमाचा
कहँ ‘ काका ' , जो ऐश कर रहे रजधानी में
नहीं डूब सकते क्या चुल्लू भर पानी में
पुत्र छदम्मीलाल से, बोले श्री मनहूस
हिंदी पढ़नी होये तो, जाओ बेटे रूस
जाओ बेटे रूस, भली आई आज़ादी
इंग्लिश रानी हुई हिंद में, हिंदी बाँदी
कहँ ‘ काका ' कविराय, ध्येय को भेजो लानत
अवसरवादी बनो, स्वार्थ की करो वक़ालत
हिंदी की दुर्दशा - काका हाथरसी
सुना? रूस में हो गई है हिंदी अनिवार्य
है हिंदी अनिवार्य, राष्ट्रभाषा के चाचा-
बनने वालों के मुँह पर क्या पड़ा तमाचा
कहँ ‘ काका ' , जो ऐश कर रहे रजधानी में
नहीं डूब सकते क्या चुल्लू भर पानी में
पुत्र छदम्मीलाल से, बोले श्री मनहूस
हिंदी पढ़नी होये तो, जाओ बेटे रूस
जाओ बेटे रूस, भली आई आज़ादी
इंग्लिश रानी हुई हिंद में, हिंदी बाँदी
कहँ ‘ काका ' कविराय, ध्येय को भेजो लानत
अवसरवादी बनो, स्वार्थ की करो वक़ालत
हिंदी की दुर्दशा - काका हाथरसी