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गदाधर भट्ट | झूलत नागरि नागर लाल।

झूलत नागरि नागर लाल। मंद मंद सब सखी झुलावति गावति गीत रसाल॥ फरहराति पट पीत नीलके अंचल चंचल चाल। मनहुँ परसपर उमँगि ध्यान छबि, प्रगट भई तिहि काल॥ सिलसिलात अति प्रिया सीस तें, लटकति बेनी नाल। जनु पिय मुकुट बरहि भ्रम बसतहँ, ब्याली बिकल बिहाल॥ मल्ली माल प्रियाकी उरझी, पिय तुलसी दल माल। जनु सुरसरि रबितनया मिलिकै, सोभित स्त्रेनि मराल॥ स्यामल गौर परसपर प्रति छबि, सोभा बिसद बिसाल। निरखि गदाधर रसिक कुँवरि मन, पर्‌यो सुरस जंजाल॥

आओ रे सलोना मारा मीठडा मोहन

  आओ रे सलोना मारा मीठडा मोहन  आंखडली मां तमने राखूँ रे  हरि जे रे जोइये ते तमने आनी आनी आपुं  मीठाइ मेव: तमने खावा रे  ऊँची ऊँची मेडी साहेबा अजब झरूखा  झरूखे चढी चढी झांखुं रे  चुन चुन कलियाँ वाली सेज बीछावुं  भमर पलंग पर सुखवारी नांखुं रे  'मीराँ बाई के प्रभू गिरिधर निर्गुन  तारा चरण कमल पें मन राखूँ रे  आओ रे सलोना मारा मीठडा मोहन – मीरां बाई के भक्ति गीत की अद्भुत गूंज मीरां बाई, भक्ति के अमूल्य रत्नों में से एक, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपनी अनन्य श्रद्धा और प्रेम के लिए जाना जाता है, उनका यह भक्ति गीत – "आओ रे सलोना मारा मीठडा मोहन" – एक गहरी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। इस गीत में मीरां बाई ने अपने मन की गहरी भावनाओं और भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपनी दीवानगी को व्यक्त किया है। आइए, इस गीत के माध्यम से हम मीरां बाई के अद्वितीय भक्ति भाव की यात्रा पर चलें। गीत की पंक्तियाँ और उनका अर्थ: 1. आओ रे सलोना मारा मीठडा मोहन मीरां बाई श्री कृष्ण को अपने मीठे मोहन (कृष्ण) के रूप में पुकारती हैं। "सलोना" शब्द का अर्थ है ...

हनुमान चालीसा: एक अद्भुत स्तुति

https://www.flickr.com/photos/155310530@N02/39857664084.  iAspire Media's photo, licensed as Attribution  https://creativecommons.org/licenses/by/2.0/ हनुमान चालीसा: एक अद्भुत स्तुति  हनुमान चालीसा, जिसे 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में लिखा गया था, एक काव्यात्मक रचना है जो भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी के अद्वितीय गुणों, शक्ति और दिव्य चरित्र का वर्णन करती है। यह पवित्र ग्रंथ हनुमान जी की स्तुति के रूप में समर्पित है और उनके संजीवनी, वीरता और समर्पण को श्रद्धापूर्वक समर्पित किया गया है।  हनुमान चालीसा में कुल 40 चौपाइयां हैं (दो परिचयात्मक दोहों को छोड़कर), जो बजरंगबली की महिमा का बखान करती हैं। यह लघु रचना, हनुमान जी की भक्ति और उनके अद्वितीय व्यक्तित्व का सरल और प्रभावी ढंग से चित्रण करती है। यहाँ तक कि प्रभु श्रीराम का रूप और व्यक्तित्व भी बड़े सहज शब्दों में व्यक्त किया गया है, जो भक्तों के हृदय को छू जाता है।  यह काव्य रचना सिर्फ एक स्तुति नहीं, बल्कि हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और विश्वास को प्रकट करने क...