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आधुनिक युग की मीरा - महादेवी वर्मा

१. महादेवी वर्मा का जन्म फरुखाबाद में सन् १६०७ ई० में हुआ । २. रचनाएँ - कविताएँ नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत आदि । गद्य- अतीत के चलचित्र, स्मृति रेखाएँ आदि । ३. इनकी रचनाओं में मीरा की भाँति वेदना ही वेदना है। श्रीमती महादेवी वर्मा का जन्म फरुखाबाद में संवत् १६६४ में हुआ था । वह सुसंस्कृत प्रिवार की पुत्री हैं आपके पिता श्री बाबू- को गोविन्द प्रसाद भागलपुर के एक कालेज के प्रधानाचार्य थे तथा माता श्रीमती हेमरानी देवी विदुषी एवं कवियित्री थीं। आपके नाना मी ब्रजमाषा के अच्छे कवि थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा इन्दौर में हुई थी। आपने प्रयोग विश्व- विद्यालय से संस्कृत में एम० ए० की परीक्षा पास की। आपने प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य के पद को सुशोधित किया है। आपने कुछ काल तक 'चाँद' का सम्पादन कार्य किया जिसमें उनकी साहित्यिक प्रतिभा बहुत निखरी है। अपनी उदारवृत्ति के फलस्वरूप आपने कई सहयोगी साहित्यकारों को संगठित कर प्रयाग में साहित्यकार संश्चद की स्थापना की है। साहित्यकारों की सहायता करना और उनकी अप्रकाशित रचनाओं को प्रकाशन। में लाने हेतु सक्रिय सहयोग देना इस संस्था का उद्देश्य...

मन की ऐसी मूर्खता

 इस मन की ऐसी मूर्खता है कि यह श्रीराम-भक्तिरूपी गंगा को त्यागकर ओस की बूंदों से तृप्त होने की आशा करता है। जैसे प्यासा पपीहा धुएँ का गोट देखकर उसे बादल समझ लेता है, किन्तु वहाँ जाने पर न तो उसको शीतलता प्राप्त होती है और न ही पानी प्राप्त होता है, धुएँ से आँखें और फूट जाती हैं। तुलसीदासजी कहते हैं यही दशा मेरे मन की है। जैसे मूर्ख बाज काँच के फर्श में अपने ही शरीर की परछाई देखकर उस पर चोंच मारने से वह (शीघ्र ही) टूट जायगी, इस बात को भूख के मारे भूलकर शीघ्र ही उसके ऊपर टूट पड़ता है गोस्वामीजी कहते हैं वैसे ही यह मेरा मन भी विषयों पर टूटा पड़ता है। हे कृपा के भंडार ! मैं इस कुचाल का कहाँ तक वर्णन करू ? आप तो भक्तों की दशा को अच्छी तरह जानते हैं। है ईश्वरक गोस्वामी तुलसीदासजी का दारुण दुःख दूर कीजिए