सूरत पे तोरी नंदलाला ओ मैं वारी जाऊँ

 




सूरत पे तोरी नंदलाला ओ मैं वारी जाऊँ 


बिनरावन री कुंजगल्यों में राम रचावे घनश्याम 


जमना री तट पे प्रभू धेनु चरावे ग्वाल बाल और संग में रहेवे 


मुरली पे तोरी नंदलाला मैं 


डावां जो नख पें प्रभू गिरिधर धारयो इन्द्र का मान घटाए 


द्रौपदी सखी री प्रभू लज्जा जो राखी छन में यो चीर बढाय 


बाई 'मीराँ के प्रभू गिरिधर नागर हरख निरख गुन गाय 


धुन ये है आम तेरी रहगुज़र होने तक

 कृष्ण बिहारी 'नूर' की ग़ज़ल

धुन ये है आम तेरी रहगुज़र होने तक

हम गुज़र जाएँ ज़माने को ख़बर होने तक


मुझको अपना जो बनाया है तो एक और करम

बेख़बर कर दे ज़माने को ख़बर होने तक

 

अब मोहब्बत की जगह दिल में ग़मे-दौरां है

आइना टूट गया तेरी नज़र होने तक

 

ज़िन्दगी रात है मैं रात का अफ़साना हूँ

आप से दूर ही रहना है सहर होने तक

 

ज़िन्दगी के मिले आसार तो कुछ ज़िन्दा में

सर ही टकराईये दीवार में दर होने तक


यह ग़ज़ल एक आदमी की जीवन दृष्टि को दर्शाती है जो अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के साथ लड़ रहा है। इस ग़ज़ल में कई तरह के भाव व्यक्त किए गए हैं जैसे कि उम्मीद, अधूरापन, दुःख और इच्छा। इस ग़ज़ल में अधिकतर पंक्तियों में समय की महत्वता दर्शाई गई है। इस ग़ज़ल में आदमी अपनी यात्रा के बारे में सोचता है जो जीवन और मृत्यु से शुरू होकर ख़त्म होती है। इस ग़ज़ल में एक भव्य भाव है जो हमें याद दिलाता है कि हमारी ज़िन्दगी का समय बहुत कीमती है और हमें उसे उत्तम ढंग से जीना चाहिए।


ये शीशे, ये सपने, ये रिश्ते ये धागे

 

ग़ज़ल सुदर्शन फ़ाकिर 

ये शीशे, ये सपने, ये रिश्ते ये धागे

किसे क्या ख़बर है कहाँ टूट जायें

मुहब्बत के दरिया में तिनके वफ़ा के

न जाने ये किस मोड़ पर डूब जायें


अजब दिल की बस्ती अजब दिल की वादी 

हर एक मोड़ मौसम नई ख़्वाहिशों का

लगाये हैं हम ने भी सपनों के पौधे

मगर क्या भरोसा यहाँ बारिशों का


मुरादों की मंज़िल के सपनों में खोये

मुहब्बत की राहों पे हम चल पड़े थे

ज़रा दूर चल के जब आँखें खुली तो

कड़ी धूप में हम अकेले खड़े थे


जिन्हें दिल से चाहा जिन्हें दिल से पूजा

नज़र आ रहे हैं वही अजनबी से

रवायत है शायद ये सदियों पुरानी

शिकायत नहीं है कोई ज़िन्दगी से

इस रिश्ते में कुछ ख़ास होता है

 ये रिश्ता कुछ अजीब होता है, जिसमें ना नफरत की वजह मिलती है और ना ही मोहब्बत का सिला। इस रिश्ते में कुछ ख़ास होता है जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। यह रिश्ता दो लोगों के बीच में एक अलग स्तर पर होता है, जो दूसरों के साथ नहीं होता है।

शायद इस रिश्ते में दोनों की आत्माओं का संबंध होता है, जो सामान्य ज़िन्दगी में नहीं होता है। यह रिश्ता एक अलग रूप में विकसित होता है, जो दो लोगों को अनुभव करने की अनुमति देता है। इस रिश्ते में कुछ ख़ास होता है, जो शायद दो लोगों को ही पता होता है।


कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियाँ 
ना नफरत की वजह मिल रही है,ना मोहब्बत का सिला

जब तेरी बातों में हमने क्या देखा

 जब तेरी बातों में हमने कई रंग देखे हैं। जिंदगी की उलझनों से निपटने की आशा, खुशियों की उम्मीद, दर्दों के इलाज की दुआ, अपने सपनों को पूरा करने की तमन्ना, समय के अनुकूल बनने की इच्छा, और अधिक अनुभवों के साथ तुम्हारे साथ जुड़ने की इच्छा। हमने तुम्हारी बातों से अनेक भावनाओं का संगम देखा है।


जब तेरी बातों में हमने क्या देखा

उम्मीद की किरण या ख्वाब देखा

तेरी यादों में हमने क्या देखा

खुशी की राह में कब झुका देखा

दिल के दरवाज़े पर क्या देखा

खुशियों की राह पर तेरा इंतज़ार देखा

दिल की दीवार-ओ-दर पे क्या देखा

दिल की दीवार-ओ-दर पे क्या देखा

बस तेरा नाम ही लिखा देखा


तेरी आँखों में हमने क्या देखा

कभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा

 

अपनी सूरत लगी पराई सी

जब कभी हमने आईना देखा  


सुदर्शन फ़ाकिर 


बंद आँखों के अहसास

बंद आँखों के अहसास बेहद कुछ कहते हैं। जब हमारी आँखें बंद होती हैं, तो हम सीधे अपने अंदर की दुनिया में पहुंच जाते हैं। हमारी आंखें जो नूर और रंग दुनिया को दिखाती हैं, उनके बंद होने से हमें एक नयी दुनिया का अनुभव होता है। बंद आँखों से हम सुन, स्पर्श, गंध और स्वाद की दुनिया में जीते हैं। इसलिए बंद आँखों के अहसास अनमोल होते हैं।